मीँ अपनी बेटी को डाँट रही थी” देख बेटी सुधर जा वर्ना तेरी शादी किसी भिखारी से कर दूँगी.
.
.
.
तभी बाहर से आवाज आई..” माँ जी , खड़े रहें कि जांएँ

No comments:

Post a Comment